पीसीसी चीफ कमलनाथ का -सवाल नंबर दो -

पीसीसी चीफ कमलनाथ का
-सवाल नंबर दो -
मामा , क्या यही है तुम्हारी घोषणा और सच्चाई का फर्क ?
क्यों मप्र को बना दिया बीमारियों का नर्क ?
कल मोदी सरकार ने बताया था कैसे हुआ मप्र की स्वास्थ्य सुविधाओं का बेड़ा गर्क ;
आज उन्हीं से सुनिये प्रदेश कैसे बन गया बीमारियों का नर्क
1) मप्र में पिछले 2 सालों में (2016-2017) एक्यूट रेस्पिरेटरी इंफेक्शन से 35 लाख 81 हजार 936 लोग पीड़ित हुए।
2) पिछले 2 सालों में (2016-2017) एक्यूट डायरिया से 14 लाख 80 हजार 817 लोग पीड़ित हुए।
3) पिछले 5 सालों में गंभीर संक्रामक बीमारियों से 3 लाख 91 हजार 18 लोग पीड़ित हुए।
4) पिछले 2 सालों में टाइफॉइड से 2,29,532 लोग पीड़ित हुए ।
5) मप्र में 1आदमी के ग्रामीण क्षेत्र में अस्पताल में 1बार भर्ती होने पर औसत खर्च 25961रु आता है,जो बड़े राज्यों में सबसे अधिक की श्रेणी में है। जो बिहार जैसे राज्य में 15237रु,तमिलनाडु में 16042रु,उप्र में 15393 रु है।
6) पूरे देश में मप्र में सर्वाधिक 42.8% अर्थात 48 लाख बच्चे कुपोषण का शिकार हैं ।
7) मप्र के 68.9 % बच्चे खून की कमी के शिकार और 15 से 49 साल की 52.4% महिलाएं खून की कमी की शिकार हैं ।
8) मप्र में एक साल तक के बच्चों की मृत्यु दर देश में सबसे अधिक 47 अर्थात 90 हजार बच्चे अपना पहला जन्मदिन भी नहीं मना पाते और मौत की आगोश में समा जाते हैं 9) बिहार, उत्तर प्रदेश के बाद तीसरा राज्य मप्र है,जहाँ कुल प्रजनन दर सर्वाधिक (टोटल फर्टिलिटी रेट ) 3.1 है।
10) मध्यप्रदेश में 89.6% महिलाओं की पूरी गर्भावस्था के दौरान पूरी जाँच नहीं होती । 11) मध्यप्रदेश में 46% बच्चों का सम्पूर्ण टीकाकरण नहीं होता।
सोर्स :- एनएफएचएस - 4, एनएचपी- 2018 केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय 

मामा , क्या यही है तुम्हारी घोषणा और सच्चाई का फर्क ?

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