विधानसभा परिणाम को लेकर जिले में वर्षों से जमे प्रशासनिक अधिकारियों की सांसे फूलने लगी

*विजेन्द्रसिंह ठाकुर देवास टोंकखुर्द


देवास जिले में चुनावी हल चल के चलते यहां के अधिकारियों को भी चिंता सताने लगी है ग्रामीण अंचल के भोले भाले किसानों को ये अधिकारी वर्षो से परेशान कर रहे है और शासन की योजनाओं पर वर्षों से जमे प्रशासनिक अधिकारी पूरी तरीके से चोरी नहीं बड़े स्तर पर डाका डाल रहे हैं, लेकिन वर्तमान स्थिति का आकलन करें तो पूरे मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल को देखते हुए कांग्रेस की सरकार बनते देख देवास जिले के प्रशासनिक अधिकारी के माथे पर अभी से चिंता की लकीर खींचते दिखाई दे रही है। इसका मुख्य कारण जिले में बैठे अधिकारी जो लंबे समय से भाजपा सिपाह सलाहकारों के आशीर्वाद से ही यहां पर जमे हुए हैं। जबकि मध्यप्रदेश शासन की ट्रांसफर गाइडलाइन के अनुसार 3 वर्ष में ही जिले से बाहर का रास्ता इन अधिकारियों को गाइडलाइन के अनुसार दिखाना था , लेकिन इन अधिकारियों की बड़ी सेटिंग के चलते यहां पर अभी भी पदस्थ हैं।कई बड़े अधिकारियों पर लगे हैं भ्रष्टाचार के आरोप 


देवास जिले की सोनकच्छ विधानसभा के कई अधिकारियों के ऊपर भ्रष्टाचार के भी आरोप लग चुके हैं ,जांच होने पर यह सिद्ध हुआ है, लेकिन ऊपर तगड़ी सेटिंग होने के चलते यह हमेशा सेटिंग कर बच रहे हैं। लेकिन जैसे ही मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है तो इनके ऊपर बैठे आका भी इनको बचा नहीं पाएंगे। 


भाजपा कार्यकर्ता से ज्यादा फुल रही अधिकारियों की सांसे। 


विधानसभा चुनाव के परिणाम को एक ही दिन बचा है। जहां भाजपा-कांग्रेस उम्मीदवारों की धड़कन चुनाव परिणाम को लेकर तेज हो चली है ,लेकिन उससे ज्यादा सांसे तो प्रशासनिक अधिकारियों की फूली हुई है। अगर प्रदेश सहित जिले में कांग्रेस की सरकार बनती है तो इन अधिकारियों को जेल की हवा सहित कई अधिकारियों को जिले से बाहर का रास्ता देखना तय है। 


कांग्रेस के कद्दावर नेता के राडार पर है यह अधिकारी। 

देवास जिले में प्रशासनिक अधिकारी जो भाजपा सरकार में रहते हुए कई प्रादेशिक अध्यक्षों के पांव छूते हुए भी दिखाई दिए हैं एवं इन अधिकारियों पर कांग्रेस के ही कद्दावर नेताओं द्वारा भाजपा एजेंट के रूप में कार्य करने के भी आरोप लगे हैं । अगर प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनती है तो सबसे पहले जिले के अंदर इन पांव पकड़ अधिकारियों की रवानगी तय है एवं इनके कार्यकाल की भी जांच होना लगभग तय हैं ।

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