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 भोपाल :-  पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए एडवायजरी जारी की है। इसमें लिखा गया है कि वे किसी कार्यक्रम या समारोह में मंच पर नहीं बैठेंगे। आयोजन के मुख्य अतिथी होने के बाद भी मंच के नीचे ही उनकी कुर्सी लगाई जाएगी। इसके अलावा दिग्विजय सिंह ने बैनर-पोस्टर में तस्वीर लगाने या उनके नाम की नारेबाजी करने को भी मना किया है।

उन्होंने स्वागत-सत्कार न करने के भी निर्देश जारी किए हैं। ये एडवायजरी उनके कार्यालय से औपचारिक रुप से जारी की गई है। उनके दौरा-कार्यक्रमों के साथ भी नोट लगाकर इन बिंदुओं को भेजा जा रहा है। दिग्विजय सिंह ने ये पहल महात्मा गांधी की १५०वीं जयंति के मौके पर की है। उनका मानना है कि गांधी के अनुसार रोजमर्रा की जिंदगी में दिखावे से ज्यादा सादगी की आवश्यकता है और वे यही कोशिश कर रहे हैं।


दिग्विजय के कार्यालय से ये एडवायजरी जारी :                           
                       

- दिग्विजय सिंह के मुख्य आतिथ्य में आयोजित कार्यक्रमों में वे मंच पर नहीं बैठेंगे। मंच पर सिर्फ मंच संचालक रहें। संचालक के आमंत्रित करने पर वक्ता मंच पर पहुंचें। सम्मान समारोह में सम्मानित होने वाले और सम्मानित करने वाले लोगों को ही मंच पर बुलाया जाए।


- उनका स्वागत फूल,माला और गुलदस्ते न करें। आयोजनकर्ता गांधीजी की विचारधारा के अनुसार स्वागत के लिए सूत की माला का प्रयोग कर सकते हैं। सिर्फ एक ही व्यक्ति स्वागत करे। बैनर,पोस्टर और फ्लैक्स पर उनकी तस्वीर न लगाएं। ढोल,आतिशबाजी और पटाखों का प्रयोग न करें। उनके नाम की नारेबाजी भी न करें।

- कार्यक्रम की शुरुआत गांधीजी के प्रिय भजन रघुपति राघव राजाराम कि साथ की जाए।
- इसके बाद कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोग एक मिनट का मौन धारण करें फिर कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की जाए।

भोपाल से गजेंद्र सिंह चंद्रावत की रिपोर्ट। .....                               
                                                                                                                                                                                          भोपाल।प्रदेश कैबिनेट से मंजूरी के छह महीने बाद आखिरकार नई रेत खनन नीति लागू हो गई है। खनिज विभाग ने नई नीति की अधिसूचना जारी कर दी है। जिसके तहत ग्रामीण खुद के भवन के निर्माण के लिए आसपास की किसी भी खदान से रेत खदान का उठाव कर सकेंगे। रेत लेने से ग्रामीणों को न तो ठेकेदार रोक पाएगा और न ही पुलिस-प्रशासन का कोई नुमाइंदा रोकेगा। रेत उठाने के लिए संबंधित ग्राम पंचायत को तत्काल अनुमति देनी होगी। अब रेत खदानों से रेत का परिवहन जीपीएस लगे वाहनों से ही हो सकेगा। 
प्रदेश में रेत नीति लागू हो गई है। नई नीति के तहत ग्रामीण एक साल में 10 घन मीटर तक रेत ही मुफ्त में उठा सकेंगे। जबकि कुम्हार, किसान कुआ एवं घर बनाने के लिए मुफ्त में रेत ले सकेंगे। नीति में अवैध उत्खनन रोकने एवं नदियों के संरक्षण का भी ध्यान रखा गया है। नर्मदा नदी से मशीनों से रेत का खनन पूर्णत: बंद कर दिया है। जबकि अन्य नदियों में मशीनों से खनन सिर्फ प्रशासनिक अनुमति से ही हो सकेगा। 5 हेक्टेयर की खदानों रेत का खनन श्रमिक समितियों से होगा। 5 हेक्टेयर से बड़ी खदानों में खनन के लिए स्थानीय मजूदरों को प्राथमिकता दी जाएगी। 
पुल से 200 मीटर दूरी पर होगा खनन
नई नीति के तहत नदी पर बने पुल से 200 मीटर के बाहर रेत का खनन हो सकेगा। बांध के पास भी रेत उत्खनन नहीं हो सकेगा। साथ ही हाईवे एवं रेल लाइन से 100 मीटर के बाहर, ऐतिहासिक इमारत एवं पुरातात्विक स्थानों से 200 मीटर बाहर ही रेत का उत्खनन हो सकेगा। 
30 दिन में हटाना पड़ेगा भंडारण
नई खनित नीति के तहत रेत का भंडारण करने वालों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई है। अब रेत कारोबारी 1 लाख घन मीटर रेत का भंडारण मान्यता प्राप्त स्थान पर ही कर सकेंगे। जिसका निपटारा 30 दिन के भीतर ही करना होगा। यदि समय पर रेत का निपटारा नहीं होता है तेा फिर जिला प्रशासन रेत को राजसात कर सकेगा। 
एक भी भंडारण पर नहीं की कार्रवाई
खनिज विभाग रेत माफिया पर किस तरह से हावी है, इसका अंदाजा नर्मदा किनारे के जिले, गांवों में लगे रेत के ढेर देखकर लगाया जा सकता है। कमलनाथ कैबिनेट ने छह महीने पहले रेत नीति को मंजूरी दे दी थी। जिसमें भंडारण क्षमता बढ़ाकर 1 लाख घनमीटर करने की अनुमति दी गई थी। लेकिन नीति की अधिसूचना जारी नहीं की गई। रेत कारोबारियों ने 1 लाख से ज्यादा मात्रा में रेत का भंडारण कर लिया। अब जब बारिश जाने की तैयारी में तब सरकार ने रेत नीति की अधिसूचना जारी की है। इस अवधि में रेत कारोबारियों ने रेत का भंडारण कर बड़ा मुनाफा कमाया है

भोपाल से गजेंद्र सिंह चंद्रावत की रिपोर्ट। .....                                 
                                                                                                                                                                                       भोपाल। ..... प्रदेश में डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे स्वास्थ्य विभाग को अगले एक महीने में डॉक्टर मिलने वाले हैं। इसके बाद प्रदेश के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (पीएचसी) व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी)पर कुछ हद तक डॉक्टरों की कमी पूरी हो सकती है। लोक सेवा आयोग (पीएससी) से बैकलॉग के 1060 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। साक्षात्कार के बाद इसमें 547 डॉक्टरों का चयन किया गया है। इनकी बतौर मेडिकल ऑफिसर ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों पीएचसी, सीएचसी में पदस्थापना की जाएगी।
पोस्ट ग्रेज्युएट मेडिकल ऑफिसर को सीएचसी, सिविल अस्पताल या फिर जिला अस्पताल में भी पदस्थ किया जा सकता है। प्रदेश के करीब 371 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में डॉक्टर नहीं हैं। इनमें अन्य पूरा स्टाफ होने के बाद भी मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। पीएससी से चयनित डॉक्टरों की पदस्थापना के बाद मरीजों को इलाज मिलने लगेगा। 
एक्स में नहीं हो रही भर्ती
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल में फैकल्टी की स्थायी भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी नहीं हो पा रही है। साक्षात्कार के लिए कमेटी नहीं बन पाने से भर्ती में देरी हो रही है। मरीजों की सुविधा के लिए एम्स प्रबंधन ने अब संविदा आधार पर भर्ती शुरू की है। सह प्राध्यापक के 43 और सहायक प्राध्यापक के 29 पदों पर भर्ती की जा रही है। इसके लिए एम्स भोपाल में 19 सितंबर को वॉक-इन इंटरव्यू रखे गए हैं। इन पदों के लिए डॉक्टर मिलते हैं तो ओपीडी व भर्ती मरीजों के इलाज में काफी सुविधा हो जाएगी। शाम की ओपीडी शुरू की जा सकती है। साथ ही ट्रामा सेंटर को भी पूरी सुविधाओं के साथ शुरू किया जा सकता है। इसके अलावा अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए बिस्तरों की संख्या भी बढ़ाई जा सकेगी।

भोपाल से गजेंद्र सिंह चंद्रावत की रिपोर्ट। ......       
                                                                                                                                                                                                                                                                        

बंगाल की खाड़ी से बनकर आये वेदर सिस्टम का असर।

24 से 48 घंटो के दौरान होगी भारी बारिश। 

नीमच, मंदसौर,रतलाम,आगर, शाजापुर, उज्जैन, देवास,इंदौर, धार,अलीराजपुर, झाबुआ,बड़वानी,बुरहानपुर,खंडवा,
खरगोन, रायसेन, राजगढ़,होशंगाबाद, हरदा,शिवनी,बालाघाट,मंडला, नरसिंहपुर, सागर,गुना,अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुरकला,

इन जगहों पर रहेगा भारी बारिश का अलर्ट।

भोपाल से गजेंद्र सिंह चंद्रावत की रिपोर्ट। .....                             
                                                                                                                                                                                         भोपाल:-  राजधानी के सबसे लोकप्रिय नेता पूर्व मुख्यमंत्री और कि बार मंत्री रहे बाबूलाल गौर का निधन हो गया है। भोपाल में नर्मदा अस्पताल में ली अंतिम सास। लंबे समय से चल रहे थे बीमार। गौर का जन्म 2 जून 1930 को उत्तरप्रदेश के प्रतापगढ़जिले में हुआ था। वे भाजपा के एक अकेले नेता रहे जिन्होंने मध्यप्रदेश विधानसभा के लगातार10 चुनाव जीते। 23 अगस्त 2004 से 29 नवंबर 2005 तक वे मप्र के मुख्यमंत्री रहे। 2013 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा फिर सत्ता में आई और उन्हें मंत्री बनाया गया।
बढ़ती उम्र का हवाला देकर पार्टी ने उनसे इस्तीफा ले लिया था।इस घटना के बाद गौर काफी दुखी हुए थे। राजनीति में आने से पहले बाबूलाल गौर ने भोपाल की कपड़ा मिल में मजदूरी की थी। श्रमिकों के हित में अनेक आंदोलनों में भाग लिया था। वे भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक सदस्य हैं। 1974 में मध्य प्रदेश शासन द्वारा बाबूलाल गौर को 'गोआ मुक्ति आंदोलन' में शामिल होने के कारण 'स्वतंत्रता संग्राम सेनानी' का सम्मान प्रदान किया गया था।


बीए और एलएलबी पास गौर पहली बार 1974 में भोपाल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में निर्दलीय विधायक चुने गए थे। उन्होंने 1977 में गोविन्दपुरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और 2013 तक लगातार 10 बार विधानसभा चुनाव जीतते रहे। 2018 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। उनकी जगह उनकी पुत्रवधु कृष्णा गौर को गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया, जहां से वह विजयी हुईं।वे 4 सितंबर 2002 से 7 दिसंबर 2003 तक मध्य प्रदेश विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे।

भोपाल से गजेंद्र सिंह चंद्रावत की रिपोर्ट। .....       
                                                                                                                                                                                     भोपाल ब्रेकिंग - 

 मौसम विभाग ने जारी किया भारी बारिश का अलर्ट। 

प्रदेश के 36 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी।

भोपाल सहित 35 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट।

आगर मालवा, अशोकनगर, बेतूल, भोपाल, देवास, धार, गुना, हरदा ,होशंगाबाद ,इंदौर, खंडवा ,मंदसौर, नीमच ,रायसेन, राजगढ़, रतलाम ,सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन, विदिशा ,अनूपपुर, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडोरी, जबलपुर, कटनी, मंडला, नरसिंहपुर, सागर, सतना, सिवनी, टीकमगढ़, उमरिया, में भारी बारिश का अलर्ट।.

भोपाल से गजेंद्र सिंह  चंद्रावत की रिपोर्ट। .....                                   
                                                                                                                                                                             भोपाल।मध्यप्रदेश में झाबुआ विधानसभा सीट पर उप चुनाव होना है। लोकसभा चुनाव में इस सीट पर बीजेपी विधायक जीएस डामोर के सांसद बनने के बाद यह सीट खाली हुई है। प्रदेश के प्रमुख दल बीजेपी और कांग्रेस इस पर दोबारा जीत के लिए पूरी ताकत झौंक रहे हैं। कांग्रेस का इस सीट पर लंबे समय से कब्जा रहा है। एक बार फिर इस सीट को जीतने के लिए अब कांग्रेस सरकार पूरा प्रयास कर रही है। यही कारण है मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अंतरराष्ट्रीय आदिवासी दिवस पर साहूकारों द्वारा लिए गए कर्ज को माफ करने का ऐलान भी किया है। 
कांग्रेस के लिए इस सीट को जीतना बहुत जरूरी हो गया है। पार्टी की स्थिरता को लेकर लगातार सवाल हो रहे हैं अगर पार्टी यह सीट जीत जाती है तो कांग्रेस बहुमत से सिर्फ एक सीट दूर रहेगी। वहीं, उसको बाकी विधायकों का बाहर से समर्थन मिला हुआ है। राजनीति के पंडितों का कहना है कि कांग्रेस सरकार के यह फैसला उप चुनाव में बड़ा बदलाव ला सकता है। कांग्रेस ने अपने खाते में बड़ी संख्या में वोटर इस फैसले से जोड़ने का प्रयास किया है। जिसका नतीजा बीजेपी के लिए काफी चौंकाने वाला आ सकता है। झाबुआ में बड़ी संख्या में आदिवासी हैं जो साहूकारों के कर्ज में डूबे हुए हैं। ऋण माफ करने के अलावा, आदिवासियों को डेबिट कार्ड दिए जाएंगे, जिसमें 10,000 रुपये की निकासी सीमा होगी। सरकार आदिवासियों के मुफ्त में जमीन और माल प्राप्त करने में भी मदद करेगी। नाथ की घोषणाओं ने आदिवासियों को खुश कर दिया है। यह कहा गया था कि झाबुआ उपचुनावों के दौरान कांग्रेस के पास कठिन समय होगा क्योंकि पहले से ही गुटबाजी हावी हो रही है। लेकिन इस घोषणा बाद से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश आ गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया के बेटे विक्रांत भूरिया को झाबुआ से हार का सामना करना पड़ा था। इस बार, भूरिया, उनके बेटे और पूर्व विधायक ज़ेवियर मेडा दावेदार हैं।
टिकट वितरण के बाद कांग्रेस नेताओं को डर है कि भूरिया और मेदा दावेदार हैं। नाथ की घोषणाओं ने कांग्रेस के पक्ष में परिदृश्य बना दिया है। भाजपा के लिए उपचुनाव जीतना आसान नहीं होगा क्योंकि उसके पास मजबूत उम्मीदवार की कमी है। नाथ के इस कदम ने भाजपा की संभावनाओं पर पानी फेर दिया है।

भोपाल से गजेंद्र सिंह चंद्रावत की रिपोर्ट। ....                       
                                                                                                                                                                                   भोपाल।अभी तक जनता ही अपने मोहल्ले का पार्षद,शहर का महापौर,नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्ष चुनती आई है, लेकिन अब यह हक उनसे छिनने जा रहा है। अब जनता केवल पार्षद चुन सकेगी,  महापौर, नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्ष पार्षद चुनेंगें।इसके लिए प्रदेश की कमलनाथ सरकार निकाय चुनावों के अधिनियमों में बड़े बदलाव करने जा रही है।इस बदलाव के बाद बीजेपी को बड़ा झटका लग सकता है।बीजेपी द्वारा इस पर आपत्ति भी जताई जा सकती है, हालांकि अभी तक बीजेपी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नही आई है।
दरअसल, मध्यप्रदेश में कुछ ही महिनों बाद नगरीय निकाय चुनाव होने है। वर्तमान में 16 नगर निगम के महापौर समेत अधिकांश नगर पालिका और नगर परिषद पर भाजपा का कब्जा हैं, लेकिन इस बार कांग्रेस की मंशा ज्यादा से ज्यादा सीटे हथियाने की है।लोकसभा में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस कोई रिस्क नही लेना चाहती है, जिसके चलते सरकार चुनाव से पहले बड़े बदलाव की तैयारी में है।
खबर है कि चुनाव में सबसे बड़ा बदलाव महापौर और नगर पालिका-नगर परिषद के अध्यक्ष के चुनाव को लेकर होगा। अधिनियम में संशोधन के लिए सीएम कमलनाथ ने मंत्रीमंडल की उप समिति का गठन किया है। कमलनाथ मंत्रिमंडल की उप समिति ने नगर पालिक निगम और नगर पालिका अधिनियम में कुछ संशोधन सुझाए हैं।   अब तक जनता इन्हें सीधे चुन रही थी, लेकिन समिति ने सुझाव दिया है कि महापौर और अध्यक्ष पद का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से कराया जाए।वही तर्क दिया गया है कि पार्टी सिंबल के बजाय चुनाव जिला पंचायत की तर्ज पर कराए जाएं।समिति ने अपनी मंशा मुख्यमंत्री कमलनाथ को बता दी है, अब आखिरी फैसला मुख्यमंत्री करेंगे।अब समिति से मिले प्रस्तावों को कैबिनेट की बैठक में लाया जाएगा। इसके बाद अध्यादेश भी लाया जाएगा।

गजेंद्र सिंह चंद्रावत की रिपोर्ट। ....                                       
                                                                                                                                                                                   भोपाल।चुनाव आयोग ने भोपाल से बीजेपी उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के चुनाव प्रचार करने पर तीन दिन की रोक लगाई. यह रोक कल सुबह 6 बजे से लागू होगी. आयोग ने यह फैसला साध्वी के दिवंगत एटीएस चीफ हेमंत करकरे और बाबरी मस्जिद को लेकर दिए बयान पर लिया। 
गौरतलब है कि प्रज्ञा ठाकुर ने हेमंत करकरे की शहादत को अपने द्वारा दिए गए श्राप का नतीजा बताते हुए कहा था, "उन दिनों मैं मुंबई जेल में थी। जांच आयोग ने सुनवाई के दौरान एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे को बुलाया और कहा कि जब प्रज्ञा के खिलाफ कोई सबूत नहीं है तो उन्हें छोड़ क्यों नहीं देते. तब हेमंत ने कई तरह के सवाल पूछे, जिस पर मैंने जवाब दिया कि इसे भगवान जाने. इस पर करकरे ने कहा कि 'तो, क्या मुझे भगवान के पास जाना होगा'."
प्रज्ञा ने कहा था, "उस समय मैंने करकरे से कहा था कि तेरा सर्वनाश होगा, उसी दिन से उस पर सूतक लग गया था और सवा माह के भीतर ही आतंकवादियों ने उसे मार दिया था. हिदू मान्यता है कि परिवार में किसी का जन्म या मृत्यु होने पर सवा माह का सूतक लगता है. जिस दिन करकरे ने सवाल किए, उसी दिन से उस पर सूतक लग गया था, जिसका अंत आतंकवादियों द्वारा मारे जाने के साथ हुआ."
26 नवंबर, 2008 को मुंबई में आतंकवादियों ने हमला किया था. इन आतंकवादियों का मुकाबला करते हुए हेमंत करकरे शहीद हुए थे। विवादित बयान का चौतरफा विरोध होने के बाद प्रज्ञा ठाकुर को यू-टर्न लेना पड़ा था और उन्होंने सार्वजनिक तौर पर माफी मांगते हुए अपना बयान वापस लिया था.

गजेंद्र सिंह चंद्रावत की रिपोर्ट। ..                                         
                                                                                                                                                                                      भोपाल।चुनाव आयोग ने भोपाल लोकसभा से बीजेपी प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के विवादित बयानों पर कार्रवाई करते हुए 72 घंटे का  प्रतिबंध लगा दिया है। आयोग के इस कदम पर कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह ने स्वागत करते हुए साध्वी का नामांकन रद्द करने की मांग की है। 
उन्होंंने ट्विट कर लिखा है कि, चुनाव आयोग का यह निर्णय अभिनंदनीय है । भाजपा साम्प्रदायिक विद्वेष की राजनीति करने वालों तथा आतंकवाद के आरोपियों को जब उम्मीदवार बनाएगी तब ऐसा होना स्वाभाविक है। आदर्श लोकतान्त्रिक मूल्यों की स्थापना व संरक्षण हेतु इस प्रकार के प्रत्याशियों का नामांकन रद्द करना श्रेयस्कर होगा ।
दरअसल, साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने हाल ही में एटीएस चीफ शहीद हेमंत करकरे और बाबरी मस्जिद के ढांचे के बारे में विवादित बयान दिए थे। हेमंत करकरे की शहादत को अपने द्वारा दिए गए श्राप का नतीजा बताते हुए कहा था, "उन दिनों मैं मुंबई जेल में थी। जांच आयोग ने सुनवाई के दौरान एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे को बुलाया और कहा कि जब प्रज्ञा के खिलाफ कोई सबूत नहीं है तो उन्हें छोड़ क्यों नहीं देते. तब हेमंत ने कई तरह के सवाल पूछे, जिस पर मैंने जवाब दिया कि इसे भगवान जाने। इस पर करकरे ने कहा कि 'तो, क्या मुझे भगवान के पास जाना होगा'."
प्रज्ञा ने कहा था, "उस समय मैंने करकरे से कहा था कि तेरा सर्वनाश होगा, उसी दिन से उस पर सूतक लग गया था और सवा माह के भीतर ही आतंकवादियों ने उसे मार दिया था. हिदू मान्यता है कि परिवार में किसी का जन्म या मृत्यु होने पर सवा माह का सूतक लगता है. जिस दिन करकरे ने सवाल किए, उसी दिन से उस पर सूतक लग गया था, जिसका अंत आतंकवादियों द्वारा मारे जाने के साथ हुआ.

संवाददाता मौ.हुसैन खान                                                 


भोपाल/अवधपुरी इलाके में बुधवार रात एक युवक ने डीएसपी को घर में घुसकर गोली मार दी। गंभीर अवस्था में परिजन उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचे,वहां डॉक्टर ने डीएसपी को मृत घोषित कर दिया।

वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। आरोपी की मां सायबर सेल में हवलदार के पद पर है। घटना की वजह पारिवारिक विवाद बताई जा रही है, हालांकि अभी स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है।

अवधपुरी पुलिस के मुताबिक गोरेलाल अहिरवाल (60), ए-196 अवधपुरी में परिवार के साथ रहते थे। वह पीएचक्यू की सीआईडी शाखा में डीएसपी के पद पर पदस्थ थे। डीएसपी अहिरवाल शाम करीब 7 बजे अपने घर पर थे। इस दौरान उनका पारिवारिक मित्र हिमांशु प्रताप सिंह उनके घर पहुंचा।

किसी मुद्दे पर हिमांशु का उनसे विवाद हो गया। हिमांशु पहले कमरे से निकलकर घर के गेट की तरफ बढ़ा। इसके बाद पिस्टल निकालकर डीएसपी अहिरवार को गोली मार दी। गोली उनके पेट में लगी। परिजन उन्हें लेकर अरेरा कॉलोनी स्थित एक निजी अस्पताल पहुंचे। वहां डॉक्टर ने जांच करने के बाद डीएसपी को मृत घोषित कर दिया। वारदात के बाद हिमांशु मौके से फरार हो गया। हिमांशु नेहरू नगर स्थित पुलिस लाइन में रहता है। उसकी मां अर्चना सिंह सायबर सेल में हवलदार के पद पर पदस्थ है।

3 अप्रैल को हुई थी बायपास सर्जरी

शहर के विभिन्न थानों में सब इंस्पेक्टर, टीआई रहे जीएल अहिरवाल को वर्ष 2014 में हार्ट अटैक आया था। वह तीन साल से पीएचक्यू की सीआईडी शाखा में पदस्थ थे। 3 अप्रैल को उनकी बायपास सर्जरी हुई थी। घटना की सूचना मिलते ही आईजी जयदीप प्रसाद, डीआईजी इरशाद वली। आईजी सीआईडी आईपी कुलश्रेष्ठ, डी श्रीनिवास वर्मा, एसपी सीआईडी अरविंद सक्सेना सहित अन्य आला अफसर अस्पताल पहुंच गए और अहिरवाल के परिजनों को ढांढस बंधाया। आईजी जयदीप प्रसाद के मुताबिक हत्या का केस दर्ज कर आरोपित हिमांशु प्रताप सिंह की तलाश की जा रही है

गजेंद्र सिंह की रिपोर्ट। ..     
                                                                                                                                                                            भोपाल:- भोपाल से कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह ने कलेक्टाेरेट में नामांकन दाखिल किया। नामांकन के दौरान उनके साथ पत्नी अमृता सिंह, बेटा जयवर्धन सिंह, मंत्री पीसी शर्मा मौजूद रहे। इसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिग्विजय ने कहा कि हिन्दुत्व शब्द मेरी डिक्शनरी में शामिल नहीं। इसके बाद उन्होंने पत्रकारों से ही सवाल पूछ लिया। कहा- आप लोग क्यों हिन्दुत्व शब्द का इस्तेमाल करते हैं।दिग्विजय सिंह ने कहा, "हमारी कोशिश होगी कि भोपाल एक ग्लोबल सिटी हो, जहां हम दुनिया भर से रोज़गार अपने यहां ला सकें।"

असल में, नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया के उस सवाल का जवाब दे रहे थे, जिसमें पूछा गया कि वह हिन्दुत्व आतंकवाद पर क्या कहेंगे। इस पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि इस बारे में आपको अमित शाह से पूछना चाहिए। जिन्होंने आरके सिंह को भाजपा में शामिल कर लिया,जो तत्कालीन गृह सचिव थे और उन्होंने हिन्दू आतंकवाद की बात कही थी।

दिग्विजय सिंह, जब नामांकन के लिए चले तो उनके साथसमर्थकों का भारी हुजूम भी कलेक्टोरेट पहुंचा, यहां पर पुलिस ने उन्हें बैरिकेडिंग के जरिए बाहर ही रोक दिया। इससे पहले दिग्विजय सिंह पत्नी अमृता सिंह के साथझरनेश्वर मंदिर पहुंचे, जहां पर उन्होंने अपने गुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती से मिले, उनका आशीर्वाद लिया औरविशेष पूजा-अर्चना की। इसके बाद आधे घंटे तक उनसे अकेले में चुनावी रणनीति पर चर्चा की। इस मौके पर दिग्विजय सिंह ने चुनाव के मुद्दे पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।

गजेंद्र सिंह चंद्रावत। ....                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                           
भोपाल।लोकसभा चुनाव को लेकर आयोग ने भी अपनी तैयारियां शुरु कर दी है। इस बार  भारत निर्वाचन आयोग ने लोकसभा निर्वाचन 2019 में अभ्यर्थियों के लिये व्यय सीमा रूपये 70 लाख निर्धारित की है।2014  में यह सीमा 40  लाख रुपये थी।इसके साथ ही वाहनों के इस्तेमाल पर अभ्यर्थी को अनुमति लेनी होगी। खास बात ये है कि विधानसभा चुनाव की तरह लोकसभा चुनाव में भी प्रत्याशी को अलग से खाता खुलवाना अनिवार्य होगा, और व्यय का भुगतान चेक के माध्यम से ही होगा।  इसके अलावा प्रत्याशियों द्वारा कानून के अन्तर्गत सीमा में किए गये सभी व्यय जैसे पोस्टर, बैनर, वाहन, प्रिन्ट एवं इलेक्ट्रानिक विज्ञापन, जनसभा, टेंट और ऐसे सभी व्यय जिनका रिकॉर्ड संधारित किया जाता है, इन सभी के लिए व्यय सीमा निर्धारित की गई है। निर्वाचन घोषणा की तारीख से लेकर परिणाम की घोषणा तक राजनीतिक दलों का पार्टी व्यय पर उडनदस्ता नजर रखेगा। 
                                                                                                                                                               बैंक में खाता खुलवाना और व्यय का चैक से करना होगा भुगतान
लोक सभा निर्वाचन में प्रत्याशियों द्वारा कानून के अन्तर्गत सीमा में किये गये सभी व्यय जैसे पोस्टर, बैनर, वाहन, प्रिन्ट एवं इलेक्ट्रानिक विज्ञापन, जन-सभा, टेंट और ऐसे सभी व्यय जिनका रिकार्ड संधारित किया जाता है, इन सभी के लिए व्यय सीमा निर्धारित की गई है। सभी अभ्यर्थियों को व्यय के लिये बैंक में खाता खुलवाना अनिवार्य होगा और व्यय का भुगतान चैक द्वारा किया जायेगा। प्रत्याशियों को व्यय का अलग रजिस्टर बनाना होगा। जिसमें रोजाना का खर्चा प्रत्याशियों को रजिस्टर में लिखना होगा। व्यय पर्यवेक्षक कभी भी इन रजिस्टर का निरीक्षण कर सकते है। हर 15 दिन में प्रशासन की लेखा टीम और प्रत्याशियों द्वारा जोड़े गए हिसाब का मिलान किया जाएगा।
                                                                                                                                                                     वाहनों के लिए लेनी पडेगी अनुमति
प्रत्याशियों को लोकसभा चुनाव में इस्तेमाल किए जाने वाले सभी वाहनों की अनुमति जिला रिटर्निंग अधिकारी से लेनी पड़ेगी। अनुमति के बाद ही वाहन प्रचार में लगा पाएंगे। यदि बिना परमिशन के वाहन चलाए गए तो जब्ती की कार्रवाई प्रशासन करेगा।
                                                                                                                                                                   अभ्यर्थी को 48 घंटे में देना होगा जवाब
जिन मामलों में अभ्यर्थी या उसके निर्वाचन एजेन्ट द्वारा नोटिस मिलने के 48 घण्टों की समय सीमा में उत्तर प्रस्तुत नही किया जाता है तो यह माना जायेगा कि नोटिस में उल्लेखित छुपाई गई धनराशि की बात स्वीकार कर ली है और ऐसे अभ्यर्थी के निर्वाचन व्यय  में राशि को जोड़ा जायेगा। जिन भी मामलों में अभ्यर्थी या उसके एजेंट को प्रशासन द्वारा नोटिस दिया जाएगा उसके 48 घंटों के अंदर नोटिस का जवाब देना होगा। जवाब नहीं देने पर प्रत्याशी के खिलाफ रिटर्रिंग अधिकारी कार्रवाई करेंगे। नोटिस दिये जाने के बावजूद यह विफलता बनी रहती है तो ऐसे नोटिस के तामील किये जाने के 48 घंटो के बाद भारतीय दण्ड संहिता के अंतर्गत एफ आई आर दर्ज की जायेगीं, और निर्वाचन अभियान के लिए अभ्यर्थी द्वारा वाहनों के इस्तेमाल के लिए अनुमति वापस ले ली जायेगी
                                                                                                                                                                     आयोग द्वारा रखी जाएगी पैनी नजर
निर्वाचन की घोषणा की तारीख से लेकर परिणाम घोषणा की तारीख तक राजनैतिक दलों के पार्टी व्यय पर उड़नदस्ता के जरिये जिला प्राधिकारियों द्वारा नजर रखी जायेगी। यह व्यय अभ्यर्थी के व्यय में नही जोड़ा जायेगा फिर भी साक्ष्य के साथ अभिलेखवद्ध प्रेक्षकों की रिपोर्ट निर्वाचन परिणामों की घोषणा के 45 दिनों में विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को दी जानी चाहिये।निर्वाचन व्यय मॉनीटरिंग के लिये केन्द्रीय व्यय प्रेक्षक, सहायक प्रेक्षक, नोडल अधिकारी, वीडियो निगरानी, वीडियो अवलोकन, लेखा टीम, उडनदस्ता दल(एफ.एस.टी), स्थैतिक निगरानी दल (एस.एस.टी) एवं कंट्रोल रूम के जरिये व्यय निगरानी रखी जावेगी।

गजेन्द्र सिंह चंद्रावत। .......                                                                                                                                                                     
 भोपाल।पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के राजधानी स्थित सरकारी आवास पर तीन दिन पहले कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के पहुंचने को लेकर लगाई जा रहीं अटकलों से पर्दा साफ हो गया है। सिंधिया राजधानी में अपने लिए बंगला देखने के लिए शिवराज के घर गए थे। राज्य सरकार की ओर से सिंधिया से आग्रह किया था कि शिवराज सिंह चौहान अगले एक महीने में नए बंगले में शिफ्ट होने वाले हैं, तब वह बंगला उनके लिए आवंटित किया जा सकता है। सिंधिया ने पूर्व गृह मंत्री भूपेन्द्र सिंह का बंगला मांगा था, लेकिन भूपेन्द्र सिंह ने अप्रेल तक बंगला खाली करने से मना कर दिया है। 
ज्योतिरादित्य सिंधिया पिछले 6 माह से भोपाल में सरकारी बंगले की मांग कर रहे हैं। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी पत्र लिखकर सांसद कोटे से बंगला मांगा था। लेकिन शिवराज ने उन्हें बंगला नहीं दिया। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद सिंधिया ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखकर चार इमली स्थित पूर्व गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह का बंगला मांगा। कमलनाथ ने सिंधिया का पत्र गृह विभाग को भेज दिया। इसकी खबर लगते ही भूपेन्द्र सिंह ने भी गृह विभाग को अप्रेल के पहले बंगला खाली न करने की जानकारी दे दी। सूत्रों के अनुसार गृह विभाग ने सिंधिया को सलाह दी थी कि भोपाल में भूपेन्द्र सिंह के बंगले के बाद सबसे शानदार बंगला शिवराज सिंह चौहान का है। चौहान अगले एक माह में प्रोफेसर कालोनी स्थित दूसरे बंगले में शिफ्ट होने वाले हैं। यदि सिंधिया चाहें तो यह बंगला उन्हें अलाट किया जा सकता है। पिछले भोपाल प्रवास के दौरान सिंधिया ने स्वयं शिवराज को फोन कर उनका बंगला देखने की इच्छा जाहिर की और उनके बंगले पर पहुंचे। देर रात हुई मुलाकात को लेकर तरह-तरह की अटकलें शुरू हो गईं। मजेदार बात यह है कि इन दोनों नेताओं ने इन अटकलों का सच आज तक छुपा कर रखा है। अभी यह पता नहीं चल सका है कि सिंधिया ने बंगला देखने के बाद इसे अलाट करने की सहमति दी है या नहीं। 
प्रभात भी नहीं कर रहे बंगला खाली
राज्यसभा सदस्य प्रभात झा ने भोपाल में सरकारी बंगला खाली करने से इंकार कर दिया है। उनका बंगला खाद्य मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को आवंटित किया गया था। राज्य सरकार ने अब प्रद्युम्न सिंह तोमर को पूर्व मंत्री शरद जैन वाला सी-18 शिवाजी नगर में बंगला अलाट कर दिया है। यहां बता दें कि प्रभात झा जब भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष थे, तब उस बंगले में लाखों रुपए की लागत से काम किया गया था। हालांकि प्रदेश में सत्ता जाने के बाद से झा का राजधानी में आना-जाना कम हो गया है।

 गजेंद्र सिंह चंद्रावत ......                                                                                                                                                                     
भोपाल।मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ स्विटजरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक सम्मेलन से लौट आए हैं। उन्होंने लौटते ही सबसे पहले पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि शिवराज को किसी की नहीं बल्कि कुर्सी की याद आ रही है। इसलिए वह अब झुग्गी झोपड़ी वालोंं को याद कर रहे हैं। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि जिन्होंने किसानों के नाम पर घोटाला किया है उनपर जल्द ही एफआईआर होगी। 
दो दिवसीय दौरे पर शुक्रवार को छिंदवाड़ा पहुंचे मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि सहकारी बैंकों में सबसे अधिक घोटालों की शिकायते मिली हैं। जिन किसानों ने लोन नहीं लिया उनके नाम पर भी कर्ज दिखाया जा रहा है। कॉपरेटिव बैंक के साथ मिलीभगत के तहत ये काम किया गया है। इसलिए मैंने ये निर्देश दिए हैं कि जो भी जिम्मेदार होगा उसके खिलाफ एफआईआर की जाए। ये सब घोटाले पिछली सरकार के कार्यकाल में हुए हैं। इनकी जांच करवाई जाएगी। मुख्यमंत्री कमलनाथ दो दिन के छिंदवाड़ा दौरे पर हैं। गणतंत्र दिवस पर वह छिंदवाड़ा में ध्वजारोहण करेंगे|
गौरतलब है कि कमलनाथ सरकार के जय किसान कर्ज़माफी योजना के दौरान ये घोटाले सामने आ रहे हैं। किसानों के नाम पर ऐसे लोगों ने कर्ज़ ले लिया जो उसके हक़दार ही नहीं थे. ऐसे नामों पर कर्ज़ लिया गया जिस नाम का कोई व्यक्ति है ही नहीं। वाही कई किसानों के कर्ज से अधिक राशि माफ़ी की जा रही आहे| जय किसान ऋण माफी योजना के तहत पंचायत दफ़्तरों पर उन किसानों के नाम की लिस्ट लगायी जा रही है जिनका लोन माफ किया जा रहा है। लिस्ट लगते ही किसान शिकायत और आपत्ति कर रहे हैं। लिस्ट में फर्ज़ी नाम हैं। इस गड़बड़ी के सामने आने के बाद सरकार ने किसानों के नाम पर फर्जी ऋण निकालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं| 
वहीं, पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान लगातार कांग्रेस सरकार पर हमला बोल रहे हैं| गुरूवार को वह राजधानी के एक झुग्गी बस्ती पहुंचे थे जहां उन्होंने कहा था कि जनता की सेवा करने के लिए मुझे किसी पद की ज़रूरत नहीं है। हम दोगुनी ताकत से जनता के मुद्दे उठाएंगे। ये जनता ही हमारी असली ताकत है। इनकी ज़िंदगी में कोई कष्ट न हों, यही हमारा लक्ष्य है। समझ में नहीं आता यह सरकार कौन चला रहा है। जनता के हित के लिए कोई काम नहीं कर रहा है। किसानों की फसलें नष्ट हो रही हैं और शासन-प्रशासन हाथ पर हाथ रखे बैठा है। जनकल्याणकारी योजनाओं को यदि सरकार ने बंद किया, तो ठीक नहीं होगा। मैं इसे बंद नहीं होने दूंगा। उन्होंने कहा था कि अगर सम्बल योजना बंद की तो सरकार चलाना मुश्किल कर दूंगा| उनके इस बयान पर कमलनाथ ने कहा, अब शिवराज को झुग्गी बस्ती याद आ रही है, सबकुछ याद आ रहा है, सबसे ज्यादा तो उन्हें कुर्सी की याद आ रही है|

गजेंद्र सिंह की रिपोर्ट। ...                                                                                                                                                           भोपाल - सत्ता में आते ही कांग्रेस एक के बाद एक अपने वचन पूरे कर रही है। इसी के चलते कांग्रेस ने पुलिसवालों को वीकली ऑफ का देने का भी वादा पूरा कर दिया है। आज राजधानी के 6 इंस्पेक्टर समेत जिला पुलिस बल के 351 और एसएएफ के 74 पुलिसकर्मी अवकाश पर रहेंगे। अवकाश शुरू होने पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पुलिसकर्मियों को बधाई दी है। कमलनाथ के इस फैसले से पुलिसकर्मियों में खुशी की लहर है वही जनता ने भी इस फैसले को सराहा है।
दरअसल, दो दिन पहले कमलनाथ सरकार ने पुलिसकर्मियों के वीकली ऑफ से आदेश जारी किए थे।सबसे पहले जबलपुर के पुलिसकर्मियों को अवकाश मिला। अब राजधानी भोपाल के पुलिसकर्मियों को भी अवकाश मिलने की प्रक्रिया शुरु हो गई है। आज   अकेले भोपाल में 350 से ज्यादा पुलिसकर्मी आज छुट्टी पर रहेंगे।गुरुवार को भोपाल नार्थ से बैरागढ़, छोला मंदिर और गौतम नगर थाना प्रभारी अवकाश पर रहेंगे। भोपाल साउथ से जहांगीराबाद, बिलखिरिया और अशोका गार्डन थाना प्रभारी का साप्ताहिक अवकाश होगा।भोपाल साउथ व नार्थ से तीन-तीन थाना प्रभारी गुरुवार को साप्ताहिक अवकाश पर रहेंगे।
इनके स्थान पर थाने के सीनियर सब इंस्पेक्टर पर कामकाज और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी होगी। यह पुलिसकर्मी बुधवार रात्रि गश्त के बाद अवकाश पर चले गए है और शुक्रवार की सुबह अपनी ड्यूटी पर संभालेंगें। इसे पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया है। अगर किन्हीं कारणों से जवान तय दिन में साप्ताहिक अवकाश नहीं ले पाने की स्थिति में पुलिस कर्मी को उसी महीने में साप्ताहिक अवकाश लेना होगा। यदि उस महीने में वह इस अवकाश का उपभोग नहीं करता है तो अगले महीने ये अवकाश समाप्‍त हो जाएगा।
मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर दी बधाई
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपना एक और वचन पूरा होने पर ट्वीट कर पुलिसवालों को बधाई दी। उन्होंने लिखा, पुलिसकर्मियों को एक दिन के अवकाश का जो वचन हमने दिया था, उसे पूरा करके दिखाया है। मैं पुलिसकर्मियों को बधाई देते हुए कामना करता हूं कि वो अपने परिवार को पूरा वक्त दें। इतना ही नहीं उन्होंने पुलिकर्मियों को भरोसा दिलाया कि, मेरे साथ आपके जीवन में आने वाला हर पल पहले से बेहतरीन होगा।
एक लाख पर 139 पुलिस कर्मी
प्रदेश में 1 लाख 25 हजार 585 पुलिस कर्मी हैं। जिसमें 27 हजार एसएएफ फोर्स है। जबकि 56 हजार मैदानी क्षेत्रों में तैनात हैं। प्रदेश में 21 हजार 500 पद खाली हैं। मानकों के अनुसार, एक लाख आबादी पर 193 पुलिस कर्मी हैं। जबकि  एक लाख आबादी पर 139 पुलिस कर्मी ही हैं।
गौरतलब है कि मंगलवार को नववर्ष पर पहली बार आठ हजार कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश दिया गया था। मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार 19 दिसंबर को पुलिस मुख्यालय पहुंचे कमलनाथ ने साप्ताहिक अवकाश देने की तैयारी करने के निर्देश दिए थे।  पुलिस महानिदेशक ऋषि कुमार शुक्ला ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए थे कि एक जनवरी से पुलिसकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश दिया जाए। प्रदेश में 56 हजार पुलिसकर्मी हैं। 8 हजार पुलिस कर्मी रोजाना अवकाश पर रहेंगे। अवकाश पर रहने के दौरान आठ हजार पुलिसकर्मियों के स्थान पर दूसरी यूनिट से पुलिस कर्मियों की ड्यूटी पर लगाया जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद से ही प्रदेश के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों ने अपने यहां साप्ताहिक अवकाश देने के लिए रोस्टर बना लिए थे।

भोपाल. कमलनाथ सरकार ने वंदेमातरम को पुलिस बैंड की धुन पर गायन कराने का फैसला किया है। इतना ही नहीं, राष्ट्रीय गीत तो और आकर्षक बनाने के लिए आम लोगों की सहभागिता के साथ वंदे मातरम् का गायन होगा। हर महीने के प्रथम कार्य दिवस पर सुबह 10:45 बजे पुलिस बैंड राष्ट्र भावना जागृत करने वाले धुन बजाते हुए शौर्य स्मारक से वल्लभ भवन तक मार्च करेंगे।
सरकार के फैसले में कहा गया है कि पुलिस बैंड के वल्लभ भवन परिसर में पहुंचने पर राष्ट्र गान ‘जन गण मन’ और राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’गाया जाएगा। इस कार्यक्रम को आकर्षक बनाकर आम लोगों को इसमें भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बुधवार को कहा था कि वंदेमातरम अब बड़े पैमाने पर होगा। इस आयोजन में कर्मचारियों के साथ जनता की भी भागीदारी होगी। शाह के बयान पर पलटवार करते हुए उन्होंने वंदेमातरम का अर्थ समझाते हुए कहा था- ‘आजादी की लड़ाई के दौरान वंदेमातरम गीत का अर्थ था, भारत मां को ब्रिटिश हुकूमत की गुलामी से मुक्त कराना।’
एक जनवरी को गायन नहीं होने पर मचा था घमासान : कमलनाथ सरकार आने के बाद एक जनवरी को वंदेमातरम का गायन नहीं हुआ था। सरकार के इस फैसले पर घमासान मच गया है। इसकी लपटें दिल्ली तक पहुंच गईं। रोक के 24 घंटे बाद ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने इसे कांग्रेस का शर्मनाक कदम बताते हुए कहा कि कांग्रेस मध्यप्रदेश को तुष्टिकरण का केंद्र बना रही है।
इससे पहले भोपाल में बुधवार की सुबह भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्रनाथ सिंह के नेतृत्व में विधायक विश्वास सारंग, रामेश्वर शर्मा समेत तमाम नेता मंत्रालय में वंदे मातरम के लिए पहुंचे और गायन किया था। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विधानसभा सत्र के पहले दिन 7 जनवरी को सभी विधायक सुबह 10 बजे पहले मंत्रालय के सामने मैदान में वंदेमातरम गायन करें

गजेंद्र सिंह की रिपोर्ट। .... भोपाल  मतगणना से पहले आए एक्जिट पोल के नतीजों ने मध्यप्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस में जहां जीत का जश्न मनाया जा रहा है तो भाजपा में तनाव का माहौल बना हुआ है। ऐसे में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भी हार का डर सताने लगा है और वे अभी से इसका जिम्मेदार प्रदेश के मुखिया शिवराज को ठहराने लगे है।हाल ही में बाबूलाल गौर ने कहा था कि अगर भाजपा हारती है तो इसके जिम्मेदार प्रदेश के मुखिया होंगे।इसी क्रम में अब वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा ने भी मुख्यमंत्री शिवराज पर निशाना साधा है। शर्मा का कहना है कि भाजपा जीतती है तो श्रेय मुख्यमंत्री को ही मिलेगा और अगर भाजपा हारती है तो इसका श्रेय भी शिवराज को ही लेना चाहिए।
दरअसल, एक्जिट पोल के नतीजों के बाद भाजपा नेताओं के बयान भी बदलने लगे है।मतगणना से पहले ही भाजपा नेता हार का ठीकरा मुख्यमंत्री शिवराज पर फोड़ने में लगे हुए है। हाल ही में बाबूलाल गौर ने बयान दिया था कि भाजपा हारती है तो इसके जिम्मेदार मुखिया होंगें। अब वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा ने इस बात को दोहराया है। शर्मा का कहना है कि भाजपा इस चुनाव  में बहुमत प्राप्त करती है तो इसका श्रेय अथक  परिश्रम करने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को जाएगा लेकिन अगर हारती है तो इसकी जिम्मेदारी भी श्रेय लेने वाले को ही लेनी चाहिए।शर्मा ने आगे कहा कि सत्ता में रहते हुए 'माई के लाल' जैसे दंभ भरे बयान देने से बचना चाहिए। यदि इस तरह के बयान नहीं दिए गए होते तो 5 से 10 दिन में भाजपा की बढ सकती थी और असमंजस की स्थिति ना रहती। ऐसे में अनुशासन के उस पाठ पर भी पानी फिरता नजर आ रहा है जो शनिवार को प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह द्वारा सभी पार्टी नेताओं को पढ़ाया गया था औऱ कार्रवाई की बात कही गई थी। अब सवाल खड़ा होता है क्या प्रदेशाध्यक्ष या पार्टी वरिष्ठ नेता रघुनंदन शर्मा पर कोई कार्रवाई करेगी या फिर नही।
अनुशासन के पाठ पर फिर पानी
बता दे कि मतगणना से पहले शनिवार को भाजपा कार्यालय मे हुई बैठक में प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने सभी पार्टी नेताओं को अनुशासन का पाठ पढ़ाया था। उन्होंने कहा था कि पार्टी का कोई भी नेता हो अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर को भी टारगेट कर कहा था कि वह भी इस दायरे में आते हैं।चुनाव से पहले और बाद में लगातार वह पार्टी लाइन से हट कर बयान देते आ रहे हैं। इसके अलावा हाल ही में उज्जैन सांसद चिंतामणि मालवीय पर भी आरोप है कि उन्होंंने पुलिस के साथ दुर्व्यवहार किया था। सिंह ने ऐसे सभी नेताओं को नसीहत देने का काम किया था। लेकिन नसीहत दिए अभी चौबीस घंटे भी पूरे नही हुए कि शर्मा ने ये बयान देकर भाजपा में हड़कंप की स्थिति पैदा कर दी है।बता दे कि इससे पहले भी समय समय पर शर्मा पार्टी के खिलाफ ही मोर्चा खोलते रहे हैं।

गजेंद्र सिंह। ... भोपाल।चौथी बार सत्ता बनाने का दावा कर रहे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को धनतेरस के दिन अपन नामांकन दाखिल कर दिया है। शिवराज सिंह चौहान ने उनके विधानसभा क्षेत्र बुदनी से नामांकन भरा। इस दौरान उनके साथ उनकी पत्नी साधना सिंह चौहान और दोनो बेटे भी मौजूद थे।इसके साथ ही मुख्यमंत्री शिवराज ने नाम निर्देशन पत्र(नामांकन का शपथ पत्र) में अपनी संपत्ति का भी खुलासा किया है। पत्र के अनुसार, पांच सालों में सीएम और उनके परिवार की आय सवा करोड़ बढ़ी है। ब्यौरा के अनुसार, उनके पास 10 करोड़ 45 लाख 82 हजार 140 रुपए है।  इसके साथ ही नामांकन पत्र के शपथ पत्र अनुसार साधना सिंह की संपत्ति शिवराज सिंह से दोगुनी है। पांच साल में उनकी संपत्ति में सवा चार करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है। 2013 में उनके पास छ: करोड़ 27 लाख 54 हजार 114 रुपए की संपत्ति थी।
संपत्ति का ब्यौरा
नगद राशि
शिवराज सिंह चौहान : 45 हजार
साधना सिंह : 40 हजार
बैंक एकाउंट का ब्यौरा
शिवराज सिंह चौहान
एसबीआई बैंक विदिशा- आठ लाख 36 हजार 819
एसबीआई बैंक भोपाल- पांच लाख 79 हजार 423
जिला सहकारी बैंक भोपाल- छ: लाख 10 हजार 532
साधना सिंह
एसबीआई विदिशा- नौ लाख 47 हजार 374
पीएनबी भोपाल- एक लाख 72 हजार 392
वाहन
शिवराज सिंह चौहान के पास वाहन नहीं है।
साधना सिंह के नाम से डेढ़ लाख की एक एंबेसडर है।
अन्य
शिवराज सिंह चौहान
एक रिवाल्वर- 5500 रुपए
घरेलू सामान- दो लाख 50 हजार
जमीन का ब्यौरा
शिवराज सिंह चौहान : 77 लाख रुपए
उनके पास जैत में 20 एकड़, बैस में साढ़े तीन लाख और डोलखेड़ी में ढाई एकड़ भूमि है।
साधना सिंह : तीन करोड़ 32 लाख रुपए
साधना सिंह के नाम से विदिशा में 32 एकड़ जमीन है।
आवासीय
शिवराज सिंह चौहान : एक करोड़ 95 लाख 50 हजार रुपए
उनके पास विदिशा में मकान है।
साधना सिंह : तीन करोड़ 20 लाख रुपए
उनके पास अरोरा कॉलोनी में फ्लैट है।
कुल संपत्ति का ब्यौरा
शिवराज सिंह चौहान : तीन करोड़ 15 लाख 70 हजार 274 रुपए।
साधना सिंह : सात करोड़ 30 लाख 11 हजार 866 रुपए।
अब तक का शिवराज का राजनैतिक सफर
पांच मार्च 1959 को जन्मे चौहान ने अपना पहला चुनाव वर्ष 1990 में बुधनी से ही जीता था और विधायक बने थे। इसके बाद वर्ष 2006 के उपचुनाव में प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते इस सीट पर जीते थे और फिर वर्ष 2008 एवं वर्ष 2013 के चुनाव में जीत हासिल कर इस सीट का प्रतिनिधित्व किया। वह वर्ष 2005 से मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं और लगातार 13 साल तक मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनने का उन्होंने इतिहास रचा है।
इसके अलावा, चौहान मध्यप्रदेश की विदिशा लोकसभा सीट से पांच बार लगातार सांसद भी चुने गये। वह वर्ष 1991 में हुए उपचुनाव में पहली बार विदिशा सीट से सांसद बने थे। तब यह सीट वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा खाली की गई थी, क्योंकि वाजपेयी वर्ष 1991 के आम चुनाव में विदिशा एवं लखनऊ की दो सीटों से लोकसभा चुनाव जीते थे। इसक बाद चौहान वर्ष 1996, 1998, 1999 एवं 2004 में विदिशा से सांसद बने।
वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में चौहान प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (कांग्रेस) के खिलाफ गुना जिले की राघौगढ़ सीट से चुनाव लड़े थे, लेकिन इन चुनावों में भाजपा को प्रदेश में प्रचंड बहुमत मिलने के बाद भी वह (चौहान) हार गये थे।    हालांकि, बाद में उमा भारती एवं बाबूलाल गौर सहित अन्य पार्टी नेताओं में मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा में अंदरूनी कलह हो गयी, जिसका फायदा चौहान को मिला और पार्टी ने बाबूलाल गौर को हटाकर उन्हें 29 नवंबर 2005 में मध्यप्रदेश का मुख्य…  


गजेंद्र सिंह। ....... भोपाल-विधानसभा चुनाव के मद्देनजर शहर में पुलिस द्वारा की जा रही वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस ने 15 लाख 70 हजार रुपए नकद जब्त किए।इस कार्रवाई में हमीदिया रोड पर मशहूर शायर राहत इंदौरी के पास एक लाख रुपए मिले।उनकी पुलिस से नोंक-झोंक भी हुई।रुपयों के बारे में तस्दीक होने के बाद पुलिस ने उन्हें रुपए वापस कर जाने दिया।

हनुमानगंज थाना प्रभारी सीएस रघुवंशी ने बताया कि हमीदिया रोड पर शाम करीब 4:30 बजे तलाशी के दौरान कार में सवार व्यापारी संजय बाधवानी के पास 5 लाख रुपए, पोल्ट्री फार्म मालिक सलीम खान की जीप से ढाई लाख रुपए नकद बरामद किए।इस दौरान एक सेंट्रो कार में सवार शायर राहत इंदौरी के पास एक लाख रुपए नकद मिले।रुपयों के बारे में पूछताछ करने पर वे नाराज होने लगे।उनका आरोप था कि इस तरह की चेकिंग से आम आदमी परेशान हो रहे हैं।उन्होंने बताया कि वे एक कार्यक्रम में प्रस्तुति देकर आ रहे हैं,यह रुपए संस्था ने ही उन्हें दिए हैं। इस बात की तस्दीक के लिए उन्होंने फोन पर एडीजी पवन जैन से बात भी करवाई।इसके बाद उन्हें बरामद रुपए देकर जाने दिया गया।उधर हबीबगंज में 1 लाख 74 हजार, चूनाभट्टी में 1 लाख 76 हजार,टीटी नगर में 3लाख 20 हजार और बैरसिया में डेढ़ लाख रुपए बरामद किए गए।

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